सेकंड हैंड कार मार्केट में “मीटर बैक” (Odometer Tampering) करना आम बात है। 1 लाख चली हुई गाड़ी को 40 हजार दिखा कर बेचा जाता है। आप ठगी का शिकार न हों, इसलिए हम लाए हैं एक्सपर्ट टिप्स।
Body Points:
- Service History (सबसे जरूरी): डीलर की बातों पर भरोसा न करें। गाड़ी का नंबर ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर (जैसे Maruti/Hyundai) में चेक कराएं। आपको पता चल जाएगा कि आखिरी सर्विस कब और कितने किलोमीटर पर हुई थी।
- Pedals और Steering की घिसावट: अगर मीटर पर सिर्फ 30,000 किमी है, लेकिन ब्रेक/क्लच पैडल की रबर पूरी घिस चुकी है और स्टीयरिंग चिकना हो गया है, तो समझ जाएं कि गाड़ी 1 लाख किमी से ऊपर चली है।
- Bonnet के नीचे की सील (Sealant): बोनट खोलें और किनारों पर कंपनी की पेस्टिंग (Pasting) देखें। अगर पेस्टिंग सख्त है या उखड़ी हुई है, तो गाड़ी का फ्रंट एक्सीडेंट हुआ है और बोनट बदला गया है।
- पानी के निशान (Flooded Car): सीट बेल्ट को पूरा बाहर खींचें। अगर उसके अंदर कीचड़ या फफूंद (Fungus) के निशान हैं, तो यह बाढ़ में डूबी हुई गाड़ी है। ऐसी गाड़ी कभी न लें, वायरिंग में हमेशा दिक्कत रहेगी।
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Conclusion: पुरानी कार जल्दबाजी में न खरीदें। मैकेनिक और सर्विस रिकॉर्ड ही आपको असली सच्चाई बता सकते हैं।
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