₹25,000 में चमचमाती Scorpio और ₹10,000 में Bullet? पुलिस लाइन की ‘नीलामी’ (Auction) का सच जानकर होश उड़ जाएंगे!

क्या आपने भी Facebook या Instagram पर ऐसे विज्ञापन देखे हैं— “पुलिस द्वारा जब्त की गई बुलेट सिर्फ ₹15,000 में” या “नीलामी में स्कॉर्पियो ले जाएं ₹50,000 में”? सुनने में यह किसी सपने जैसा लगता है, है न? लेकिन रुकिए!

अपनी मेहनत की कमाई लुटाने से पहले इस “सस्ते” ऑफर के पीछे का “काला सच” जान लीजिए। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर पुलिस द्वारा जब्त (Seized) गाड़ियां असल में बिकती कैसे हैं और आप उन्हें Legally कैसे खरीद सकते हैं।

क्या सच में 10-20 हजार में गाड़ियां मिलती हैं?(Reality Check)

जवाब है—हाँ और ना दोनों! पुलिस थानों में जो गाड़ियां (लावारिस, चोरी की रिकवरी, या एक्सीडेंटल) जमा होती हैं, एक समय बाद उनकी नीलामी (Auction) होती है। लेकिन सोशल मीडिया पर जो “डायरेक्ट सेलिंग” के दावे किए जाते हैं, वो 99% SCAM (धोखा) होते हैं। ठग आपको फोटो भेजते हैं और कहते हैं— “₹2000 टोकन मनी डालो, गाड़ी घर पहुंच जाएगी।” और पैसे डालते ही वो नंबर ब्लॉक कर देते हैं।

असली नीलामी (Auction) कहाँ और कैसे होती है?(Official Process)

अगर आप सच में सस्ती गाड़ी खरीदना चाहते हैं, तो “चोर दरवाज़े” से नहीं, सरकारी दरवाज़े से आएं। भारत सरकार की एक आधिकारिक वेबसाइट है— MSTC Ecommerce.

  1. Registration: आपको MSTC की वेबसाइट पर बायर (Buyer) के तौर पर रजिस्टर करना होगा।
  2. Listings: वहां आप State और Category (Scrap/Vehicle) सेलेक्ट करके देख सकते हैं कि किस थाने या विभाग की गाड़ी कब नीलाम हो रही है।
  3. Inspection: बोली लगाने से पहले आपको गाड़ी देखने का मौका मिलता है (Condition जैसी है, वैसी ही मिलेगी)।
  4. Bidding: यह ऑनलाइन बोली होती है। जो सबसे ज्यादा दाम देगा, गाड़ी उसकी।

क्या पुरानी पुलिस की गाड़ी लेना फायदेमंद है? (Pros & Cons)

सस्ती के चक्कर में यह मत भूलें:

  • Condition: गाड़ियां अक्सर सालों से धूप-बारिश में खड़ी होती हैं। इंजन सीज़ हो सकता है, टायर खराब हो सकते हैं।
  • Paperwork: कई बार पेपर्स रिन्यू कराने में RTO के बहुत चक्कर काटने पड़ते हैं।
  • Repair Cost: ₹50,000 की गाड़ी पर ₹1 लाख का खर्चा भी आ सकता है।

Conclusion (निष्कर्ष)

दोस्तों, लालच में आकर किसी को भी Google Pay या Paytm न करें। अगर “किस्मत” आजमानी है तो MSTC की वेबसाइट चेक करें, वरना “कबाड़” के भाव में “सोना” ढूंढने के चक्कर में अपनी जेब न कटवाएं।

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