गाड़ी बचाने के चक्कर में परिवार खत्म? ‘Bullbar’ (क्रैश गार्ड) लगवाने वाले सावधान! एक्सीडेंट हुआ तो Airbag नहीं कफन खुलेगा!

जब आप नई कार खरीदते हैं, तो पड़ोसी और रिश्तेदार सबसे पहले सलाह देते हैं— “भाई, आगे-पीछे बंपर गार्ड (Bullbar) लगवा ले, ट्रैफिक में कोई ठोकेगा तो गाड़ी को खरोंच नहीं आएगी।” आप ₹5000-₹10,000 खर्च करके वो लोहे का भारी-भरकम गार्ड लगवा भी लेते हैं। आपको लगता है आपने अपनी गाड़ी को “टैंक” बना दिया। लेकिन कड़वा सच यह है कि आपने अपनी गाड़ी को टैंक नहीं, बल्कि अपने और अपने परिवार के लिए “चलता-फिरता ताबूत” (Coffin) बना दिया है।

Airbags क्यों नहीं खुलते? (The Technical Reason)

कार के अगले हिस्से में (Bumper के पीछे) ‘Impact Sensors’ लगे होते हैं। जब एक्सीडेंट होता है, तो ये सेंसर टक्कर को महसूस करते हैं और मिली-सेकंड में एयरबैग्स को खुलने का सिग्नल देते हैं।

  • The Problem: जब आप लोहे का Bullbar लगवा लेते हैं, तो टक्कर का सारा झटका वो गार्ड झेल लेता है। सेंसर तक सिग्नल पहुँच ही नहीं पाता। नतीजा? भयंकर एक्सीडेंट होने पर भी एयरबैग्स नहीं खुलते और ड्राइवर की स्टीयरिंग से टकराकर मौत हो जाती है।

चेसिस (Chassis) को नुकसान

कार का डिजाइन ऐसा होता है कि टक्कर लगने पर उसका अगला हिस्सा (Crumple Zone) पिचक जाए ताकि झटकों को सोख सके। बुलबार लगाने से गाड़ी पिचकती नहीं है, और टक्कर का पूरा झटका सीधा चेसिस और उसमें बैठे यात्रियों की हड्डियों तक पहुंचता है।

सुप्रीम कोर्ट और इंश्योरेंस का नियम

  • Legal Ban: भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने Bullbar को मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गैर-कानूनी (Illegal) घोषित किया है। पकड़े जाने पर ₹1000 से ₹5000 तक का चालान हो सकता है।
  • Insurance Reject: सबसे बड़ा झटका यह है कि अगर एक्सीडेंट के वक्त आपकी गाड़ी में गैर-कानूनी बुलबार लगा है, तो इंश्योरेंस कंपनी आपका क्लेम रिजेक्ट कर सकती है। यानी गाड़ी का नुकसान भी आपका, और जान का जोखिम भी आपका।

Conclusion (निष्कर्ष): गाड़ी पर डेंट (Dent) लग जाए तो वो ठीक हो सकता है, लेकिन अगर सर पर चोट लग जाए तो वो शायद कभी ठीक न हो। आज ही अपनी गाड़ी से उस लोहे के गार्ड को हटवाएं। क्या आप सेफ्टी के लिए गार्ड हटवाने को तैयार हैं? कमेंट में बताएं।

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